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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा एक्शन, 17 साल बाद RMO अर्जुन देव का तबादला

 Published : Jun 30, 2026 07:41 am IST,  Updated : Jun 30, 2026 07:41 am IST

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT रिपोर्ट के बाद 17 वर्षों से तैनात RMO अर्जुन देव का गोरखपुर तबादला कर दिया गया है। वहीं, इस मामले में 8 आरोपी 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजे गए हैं।

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SIT की रिपोर्ट के बाद चढ़ावा चोरी मामले में ताबड़तोड़ एक्शन जारी है। Image Source : PTI

अयोध्या: राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है। SIT की रिपोर्ट के बाद राम मंदिर में लंबे समय से तैनात रेडियो मेंटेनेंस ऑफिसर (RMO) अर्जुन देव को उनके पद से हटाकर गोरखपुर ट्रांसफर कर दिया गया है। वहीं, इस मामले में गिरफ्तार सभी 8 आरोपियों को 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब बैंकों, मंदिर से जुड़े कर्मचारियों और अन्य लोगों की भूमिका की भी गहराई से जांच कर रही है।

17 साल बाद हटाए गए RMO अर्जुन देव

अर्जुन देव वर्ष 2009 से लगातार अयोध्या में तैनात थे। पिछले करीब 17 वर्षों में उनका कई बार तबादला हुआ, लेकिन हर बार किसी न किसी स्तर पर वह रुक गया। हाल ही में उनका लखनऊ तबादला भी निरस्त हो गया था। अब चढ़ावा चोरी मामले में SIT की रिपोर्ट आने के बाद उनका तबादला गोरखपुर कर दिया गया है। राम मंदिर के काउंटिंग रूम में चढ़ावे की गिनती के दौरान लगे CCTV कैमरों के साथ-साथ पूरे मंदिर परिसर में लगे करीब 1,600 CCTV कैमरों और वायरलेस व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी अर्जुन देव के पास थी।

जांच के दायरे में आए 70 से 80 लोग

सूत्रों के अनुसार, SIT की रिपोर्ट में अर्जुन देव की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वह अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर  VVIP दर्शन की व्यवस्था और मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई कार्यों में भी सक्रिय थे। यह भी बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों से करीबी के कारण उन्होंने कई बार अपना तबादला रुकवाया। पुलिस की जांच सिर्फ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और गिरफ्तार 8 आरोपियों तक सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, 

'इस मामले में 70 से 80 लोग जांच के दायरे में हैं। सभी को नोटिस भेजे गए हैं और उनसे पूछताछ की जाएगी।'

SBI समेत 6 बैंकों को नोटिस जारी

चढ़ावा चोरी की जांच अब उन बैंकों तक भी पहुंच गई है, जहां राम मंदिर ट्रस्ट के खाते हैं। पुलिस ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक समेत करीब छह बैंकों को नोटिस जारी किया है। एसबीआई से उन कर्मचारियों की सूची मांगी गई है, जिनकी ड्यूटी चढ़ावे की गिनती में लगाई गई थी। पुलिस को बैंक के 2 कर्मचारियों रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप की भूमिका पर भी संदेह है, क्योंकि दोनों बैंक की ओर से कैश काउंटिंग प्रक्रिया की निगरानी के लिए तैनात थे। इसके अलावा अयोध्या के सभी बैंकों से राम मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारियों और उनसे जुड़े लोगों के बैंक खातों का पूरा विवरण मांगा गया है।

आरोपियों के मोबाइल की होगी फोरेंसिक जांच

पुलिस को शक है कि गिरफ्तार आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से व्हाट्सएप चैट डिलीट की हैं। अब सभी आठों आरोपियों के मोबाइल फोन फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जाएंगे, ताकि डिलीट किए गए डेटा को रिकवर कर मामले से जुड़े सबूत जुटाए जा सकें। सोमवार को सभी 8 आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एंटी करप्शन कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने सभी को 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस दौरान पुलिस ने किसी भी आरोपी की रिमांड की मांग नहीं की।

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Image Source : PTIचढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट ले जाती पुलिस।

घरों से नकदी, गहने और संपत्ति के दस्तावेज बरामद

पुलिस ने आरोपियों के घरों पर छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। इनमें जमीन की रजिस्ट्री, संपत्ति के कागजात, बैंक पासबुक और अन्य दस्तावेज शामिल हैं। कुछ आरोपियों के घरों से बड़ी मात्रा में सोने-चांदी के गहने और उनकी खरीद की रसीदें भी मिली हैं। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि कहीं ये संपत्तियां और गहने चढ़ावे की कथित चोरी की रकम से तो नहीं खरीदे गए। जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों के यहां से बरामद नकदी, गहने और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।

लवकुश मिश्रा की करोड़ों की संपत्ति जांच के घेरे में

जांच में पुलिस को आरोपी लवकुश मिश्रा की पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर अयोध्या के शहादतगंज इलाके में जयपुरिया स्कूल के पीछे करीब 1,000 वर्गफीट जमीन और उस पर बन रहे तीन मंजिला मकान की जानकारी मिली है। बताया जा रहा है कि यह जमीन अक्टूबर 2025 में खरीदी गई थी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 25 लाख रुपये है। वहीं तीन मंजिला मकान के निर्माण पर 80 से 90 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। जमीन और निर्माण लागत मिलाकर कुल निवेश करीब डेढ़ करोड़ रुपये बताया जा रहा है।

पड़ोसियों के अनुसार, 3 दिन पहले तक मकान का निर्माण कार्य चल रहा था, लेकिन पुलिस जांच शुरू होने के बाद काम रोक दिया गया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि करीब 20 हजार रुपये मासिक आय वाले लवकुश मिश्रा ने इतनी बड़ी संपत्ति कैसे बनाई।

चढ़ावा चोरी मामले में आठों आरोपियों की भूमिका

FIR के मुताबिक, चढ़ावा चोरी मामले में आठों आरोपियों की भूमिका कुछ इस तरह है:

  1. रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की जिम्मेदारी मंदिर परिसर से दानपात्रों की निगरानी और उन्हें बेसमेंट तक पहुंचाने की थी। आरोप है कि इसी दौरान करोड़ों रुपये के चढ़ावे में हेराफेरी की गई।
  2. रमाशंकर मिश्रा दानपात्र को काउंटिंग रूम तक पहुंचाने और कैश काउंटिंग प्रक्रिया से जुड़े थे।
  3. लवकुश मिश्रा कैश काउंटिंग टीम का हिस्सा थे। उनके घर से करीब 12 लाख रुपये नकद मिलने का दावा किया गया है।
  4. अनुकल्प मिश्रा भी काउंटिंग रूम में कार्यरत थे। उन पर गिनती के दौरान रकम निकालने का आरोप है।
  5. सुभाष चंद्र श्रीवास्तव कैश काउंटिंग स्टाफ के प्रभारी थे। उन पर निगरानी में लापरवाही और अनियमितताओं में शामिल होने के आरोप हैं।
  6. करुणेश पांडेय दान की रकम को काउंटिंग रूम तक पहुंचाने के जिम्मेदार थे। उन पर भी कथित हेराफेरी और उससे संपत्ति बनाने का आरोप है।
  7. मनीष कुमार यादव कैश काउंटिंग टीम में थे। उनके घर से करीब 36 लाख रुपये नकद मिलने का दावा किया गया है।
  8. अविनाश शुक्ला भी दान की रकम को काउंटिंग रूम तक पहुंचाने की प्रक्रिया में शामिल थे। उन पर भी चढ़ावे की रकम के दुरुपयोग और उससे संपत्ति बनाने के आरोप हैं। पुलिस के मुताबिक, उसके घर से करीब 5 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे।

अज्ञात लोगों पर भी कार्रवाई की तैयारी

SIT जांच के बाद ट्रस्ट की ओर से दर्ज कराई गई FIR में सिर्फ 8 नामजद आरोपियों का ही नहीं, बल्कि कुछ अज्ञात लोगों का भी जिक्र किया गया है। इसका मतलब है कि जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

चढ़ावा चोरी रोकने के लिए बदलेगी व्यवस्था

जांच के साथ-साथ राम मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था को और सुरक्षित बनाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। प्रस्ताव है कि:

  1. श्रद्धालु QR कोड के माध्यम से भी चढ़ावा दे सकेंगे।
  2. नकद चढ़ावे के लिए 20 दानपात्रों की जगह केवल एक दानपात्र रखा जाएगा।
  3. सोना-चांदी का चढ़ावा सरकारी टकसाल को सौंपा जाएगा।
  4. इन प्रस्तावों पर 6 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में अंतिम फैसला लिया जा सकता है।

इस तरह देखा जाए तो राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब जांच लगातार व्यापक होती जा रही है। प्रशासनिक कार्रवाई, बैंक खातों की जांच, डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल और संपत्तियों के मनी ट्रेल की जांच से आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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